छोड़ने के दिन से पहले
अपनी वजह जानें
मुश्किल पलों में हौसला कम पड़ जाता है, इसलिए ज़रूरत पड़ने से पहले ही अपनी वजहें लिखकर रखना मदद करता है। सेहत, पैसा, आपके अपने लोग, खाने का स्वाद, अपना दिन निकोटिन के हिसाब से न बिताने की आज़ादी: जो भी आपके लिए मायने रखता है, वह गिना जाता है।
वजह जितनी ठोस होगी, उतनी ही मज़बूत होगी। “बच्चों के साथ बिना हाँफे दौड़ पाना” जैसी वजह “ज़्यादा सेहतमंद रहना” से कहीं ज़्यादा असर करती है।
यह आज़माएँ: “मैंने क्यों छोड़ी” स्क्रीन में कम से कम तीन वजहें लिखिए, जितना हो सके उतनी ठोस।
अपने ट्रिगर पहचानें
ज़्यादातर सिगरेट सोच-समझकर नहीं पी जातीं। वे किसी इशारे के पीछे आती हैं: पहली चाय-कॉफ़ी, खाने का ख़त्म होना, तनाव भरी कॉल, दोस्तों के साथ ड्रिंक, काम के बीच ब्रेक। आपके दिमाग़ ने इन पलों को इतनी बार निकोटिन से जोड़ा है कि अब तलब अपने-आप आ जाती है।
जब आप अपने ट्रिगर जान लेते हैं, तो वे आपको अचानक नहीं घेर पाते। छोड़ने के दिन से पहले आप हर एक के लिए तैयारी कर सकते हैं।
यह आज़माएँ: एक दिन तक हर सिगरेट लिखिए, और यह भी कि ठीक उससे पहले क्या हुआ था।
भरोसेमंद लोगों को बताएँ
साथ मिले तो छोड़ना आसान होता है। छोड़ने का ऐसा दिन चुनें जो आपके सबसे तनाव भरे हफ़्ते के बीच न हो, और कुछ लोगों को इसके बारे में बताएँ।
साफ़ बताएँ कि किस चीज़ से मदद मिलेगी: आपको सिगरेट ऑफ़र न करना, तीसरे दिन हालचाल पूछना, एक हफ़्ते तक आपका थोड़ा चिड़चिड़ापन झेल लेना, आपके साथ टहलने चलना। लोग अक्सर मदद करना चाहते हैं, पर उन्हें पता नहीं होता कि कैसे।
यह आज़माएँ: कम से कम एक व्यक्ति को अपने छोड़ने के दिन के बारे में बताएँ, और एक ठोस तरीका भी जिससे वे मदद कर सकें।
विकल्प तय करें
आपने जो भी ट्रिगर पहचाने, हर एक के लिए अभी तय कर लें कि उसकी जगह क्या करेंगे। खाने के बाद: उठ जाएँ, ब्रश करें या थोड़ा टहल आएँ। चाय-कॉफ़ी के साथ: उसे पीने की जगह बदल दें। तनाव में: SOS में साँस वाली एक्सरसाइज़। हाथ और मुँह के लिए: च्युइंग गम, पानी का एक घूँट, कुरकुरी सब्ज़ियाँ।
डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से निकोटिन रिप्लेसमेंट या सिगरेट छुड़ाने वाली दवाओं के बारे में पूछना भी फ़ायदेमंद है। इस तरह के सहारे के साथ इस्तेमाल करने पर ये आपकी कामयाबी की संभावना साफ़ तौर पर बढ़ा सकती हैं।
यह आज़माएँ: अपने तीन सबसे बड़े ट्रिगर के आगे एक-एक विकल्प लिखिए।
सब कुछ हटा दें
छोड़ने के दिन से पहले की शाम सब कुछ हटा दें: सिगरेट, लाइटर, ऐशट्रे, गाड़ी या दराज़ में रखा “इमरजेंसी” पैकेट। कपड़े धो लें और जिन कमरों में धुएँ की गंध है, उन्हें हवादार कर दें।
पास में सिगरेट न होने से आपके और तलब के बीच कुछ मिनट का फ़ासला आ जाता है, और तलब अक्सर उन्हीं मिनटों में चली जाती है।
यह आज़माएँ: आज रात हर सिगरेट, लाइटर और ऐशट्रे हटा दें।
शुरुआती दिन
आपका पहला दिन
आज आप निकोटिन नहीं लेंगे, और बस यही एक चीज़ सही करनी है। पूरा महीना नहीं, पूरा साल नहीं: सिर्फ़ आज।
ख़ुद को व्यस्त रखें, ख़ूब पानी पिएँ और फ़िलहाल अपने सबसे बड़े ट्रिगर से दूर रहें, ख़ासकर शराब से। तलब आएगी। हर तलब आमतौर पर कुछ ही मिनटों में चरम पर पहुँचकर उतर जाती है, भले ही वह कभी ख़त्म न होने वाली लगे।
तलब कैसे काम करती है
तलब एक लहर जैसी होती है: उठती है, चरम पर पहुँचती है और उतर जाती है, आमतौर पर कुछ ही मिनटों में। हार मान लेने से तलब बंद नहीं होती; इससे आपका दिमाग़ यह सीखता है कि लहर हमेशा निकोटिन पर जाकर ख़त्म होती है।
अगली लहर के लिए एक आसान प्लान है ये “4 उपाय”: कुछ मिनट टालें, गहरी साँस लें, एक गिलास पानी पिएँ, हाथों से कुछ और करें।
सबसे मुश्किल दिन
तीसरे दिन के आसपास निकोटिन आपके शरीर से निकल चुका होता है और छोड़ने के लक्षण अक्सर सबसे तेज़ होते हैं: चिड़चिड़ापन, बेचैनी, खराब नींद, भूख, ध्यान लगाने में दिक़्क़त। यह इस बात का संकेत नहीं कि कुछ गड़बड़ है। यह आपका दिमाग़ है जो ख़ुद को ढाल रहा है, और यह कुछ ही समय के लिए है।
आज ख़ुद के साथ नरमी बरतें। उम्मीदें थोड़ी कम रखें, समय पर खाना खाएँ, थोड़ी ताज़ी हवा लें और जल्दी सो जाएँ।